राजस्थान जिला दर्शन 2026: श्रीगंगानगर जिला | Sri Ganganagar Zilla Darshan Hindi

स्थापना - 26 अक्टूबर 1927
संस्थापक - महाराजा गंगा सिंह
प्राचीन नाम - रामू जाट की ढाणी, रामनगर
उपनाम - राजस्थान का अन्नागार, अन्न का कटोरा, फूलों की नगरी, बागानों की भूमि
शुभंकर - चिंकारा
तहसीलें - 9 (श्रीगंगानगर, करणपुर, सादुलशहर, पदमपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, सूरतगढ़, घड़साना, विजयनगर)

राजस्थान जिला दर्शन 2026: श्रीगंगानगर जिला | Sri Ganganagar Zilla Darshan Hindi

परिचय - यह राजस्थान का सबसे उत्तरी जिला है। जो पंजाब के साथ अंतराज्यीय सीमा तथा पाकिस्तान से अंतराष्ट्रीय सीमा साझा करता है। कृषि उत्पादन में अग्रणी रहने के कारण इसे राजस्थान का अन्नागार कहा जाता है। राजस्थान के जिलों को लेकर हाल ही में काफी बदलाव हुए हैं। पूर्ववर्ती सरकार ने जिलों की संख्या 50 कर दी थी, जिसमें अनूपगढ़ को श्रीगंगानगर से काटकर एक नया जिला बनाया गया था। लेकिन दिसंबर 2024 में भजनलाल सरकार ने इसे वापस श्रीगंगानगर में मिला दिया है। अब राजस्थान में कुल 41 जिले और 7 संभाग ही रहेंगे।


श्रीगंगानगर का इतिहास

प्राचीन काल में श्रीगंगानगर यौद्धेय गणराज्य का हिस्सा था। प्राचीन यौद्धेय प्रदेश के पतन और सरस्वती नदी के सूखने के बाद यह क्षेत्र एक निर्जन मरुस्थल बन गया था। 15वीं शताब्दी में जब राव बीका ने जांगल प्रदेश को जीता, तो आज के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ का रेतीला इलाका भी बीकानेर रियासत की उत्तरी सीमा के रूप में उनके अधिकार क्षेत्र में आ गया। मध्यकाल में महाराजा सूरत सिंह ने भटनेर (हनुमानगढ़) के किले को जीता था, जिसके बाद से यह क्षेत्र भटनेर के किले से नियंत्रित होता था। यहाँ कई वर्षों तक भाटी और जोहिया राजपूतों का प्रभाव रहा था। 

19वीं सदी के अंत तक आज का श्रीगंगानगर केवल 'रामू जाट की ढाणी' नामक एक छोटी सी बस्ती थी। बाद में इसे बीकानेर रियासत में रामनगर कहा जाने लगा। महाराजा गंगा सिंह के समय इस क्षेत्र में 1899 का अकाल पड़ा, जिसे छप्पनिया अकाल भी कहा जाता है। इस भीषण अकाल से यह क्षेत्र पूरी तरह से बंजर हो गया। जिसके बाद महाराजा गंगा सिंह ने ब्रिटिश सरकार और पंजाब के राज्यों के साथ बातचीत के बाद सतलुज नदी का पानी लाने की अनुमति ली। 26 अक्टूबर 1927 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने शिवपुर हेड पर गंग नहर का उद्घाटन किया। नहर आने के साथ ही महाराजा ने रामनगर का नाम बदलकर 'श्रीगंगानगर' कर दिया। 

पहले हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर जिले की ही एक तहसील हुआ करती थी। बाद में 12 जुलाई 1994 को श्रीगंगानगर का विभाजन किया गया। इस विभाजन के बाद हनुमानगढ़ राजस्थान का 31वां जिला बन गया।


I. बरोर सभ्यता

यह प्राक हड़प्पा कालीन सभ्यता स्थल है। इस स्थल की पहचान सबसे पहले 1916-17 में एल.पी. टेसिटोरी ने अपने सर्वेक्षण के दौरान की थी, लेकिन तब इसे पूरी तरह उजागर नहीं किया गया था। आजादी के बाद 1950-53 के दौरान प्रसिद्ध पुरातत्वविद् अमलानंद घोष ने सरस्वती (वर्तमान घग्गर) नदी घाटी के सर्वेक्षण में इसे एक महत्वपूर्ण हड़प्पा कालीन स्थल के रूप में चिन्हित किया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के जयपुर मंडल द्वारा बरोर की खुदाई 2003 में की गई थी। इस खुदाई का नेतृत्व बी.आर. मीणा और आलोक त्रिपाठी ने किया था। इस हड़प्पा कालीन सभ्यता स्थल से सेलखड़ी के 8000 मनके, मानव कंकाल, आभूषण, लाजवर्त पत्थर के मनके, मृदपात्र आदि अवशेष मिले हैं।

• सर्वप्रथम जानकारी - एल.पी. टेसिटोरी (L.P. Tessitari)
• पहली बार जानकारी - 1916-17 में
• खनन का कार्य - 2003 में शुरू
• खोज - सेलखड़ी के 8000 मनके, मानव कंकाल, आभूषण, लाजवर्त पत्थर के मनके, मृदपात्र(इसमें काली मिट्टी मिली)


II. रायसिंह नगर गोलीकांड

1 जुलाई 1946 को अधियाना कर (पानी पर कर) के विरोध में रायसिंहनगर में बीकानेर राज्य प्रजा परिषद का एक बड़ा आंदोलन आयोजित किया गया था। आंदोलन के दौरान जब बीकानेर राज्य प्रजा परिषद के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में जुलूस निकाल रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। जब किसानों और कार्यकर्ताओं का जुलूस आगे बढ़ रहा था, तो पुलिस ने भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में किसान बीरबल सिंह बुरी तरह घायल हो गए। घायल होने के बावजूद उन्होंने तिरंगे को नीचे नहीं गिरने दिया। अगले दिन यानी 2 जुलाई 1946 को बीरबल सिंह शहीद हो गए। बीरबल सिंह की याद में पूरे बीकानेर में 17 जुलाई 1946 को 'बीरबल दिवस' मनाया गया। इस हत्याकांड की जांच के लिए प्रजा परिषद ने एक समिति बनाई थी, जिसमें गोकुल भाई भट्ट और रघुवर दयाल गोयल जैसे बड़े नेता शामिल थे। इस घटना के बाद "बीरबल तेरा ये बलिदान, याद रखेगा राजस्थान" के नारे गूँजने लगे थे।

• बीकानेर प्रजा परिषद द्वारा 1946 ई. में अधियाना कर(पानी पर कर) के विरोध में आंदोलन
• 1 जुलाई 1946 प्रजा परिषद सदस्यों पर गोली चलाई गई।
• आंदोलन में बीरबल सिंह शहीद
• 17 जुलाई 1946 को बीकानेर प्रजामण्डल द्वारा बीरबल दिवस मनाया गया। 
• IGNP का नामकरण भी इनके नाम पर किया गया।


श्रीगंगानगर का भूगोल

श्रीगंगानगर राजस्थान का सबसे उत्तरी जिला है, जिसे 'राजस्थान का अन्नागार' और 'धान का कटोरा' भी कहा जाता है। पूर्व में यह बीकानेर रियासत का ही एक हिस्स था, बाद में 26 अक्टूबर 1927 को इसका नाम श्रीगंगानगर कर दिया गया। यहां रेतीली/ बलुई प्रकार की मिट्टी पाई जाती है और यहां से घग्घर नदी बहती है। यहां धूल भरी आंधियां ज्यादा चलती है और यहां की जलवायु उष्णकटिबंधीय शुष्क जलवायु है। राजस्थान के इस जिले के भूगोल से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण पहलू नीचे दिए गए हैं -


1. भौगोलिक स्थिति

I. क्षेत्रफल

• कुल क्षेत्रफल - 10,978 वर्ग किमी (लगभग 11,000 वर्ग किमी)
• ग्रामीण क्षेत्र - 10,725.21 वर्ग किमी
• शहरी क्षेत्र - 252.79 वर्ग किमी
• अंतरराष्ट्रीय सीमा - 210 किमी
• समुद्र तल से ऊंचाई - 165 से 178 मीटर

 

II. अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार

• अक्षांश - 28° 4' से 30° 6'(उत्तरी अक्षांश)
• देशांतर - 72° 3' से 75° 3'(पूर्वी देशांतर)


2. सीमाएं

श्रीगंगानगर में अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय दोनों भौगोलिक सीमाएं हैं -
• अंतरराष्ट्रीय - पश्चिम में इसकी सीमा पाकिस्तान ('रेडक्लिफ') से लगती है।

• अंतरराज्यीय - उत्तर में यह पंजाब राज्य की सीमाओं को छूता है।

• आंतरिक - पूर्व और दक्षिण में इसकी सीमाएं क्रमशः राजस्थान के हनुमानगढ़ और बीकानेर जिलों से मिलती हैं।

🌼 जिले का 'कोणा गांव' राजस्थान का सबसे उत्तरी बिंदु/छोर है।
🌼 'हिन्दुमलकोट' भारत-पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा का प्रारंभिक बिंदु है।


3. जलवायु

यहाँ की जलवायु विषम है, गर्मियों में अत्यधिक गर्मी (तापमान 50° C तक) और सर्दियों में कड़ाके की ठंड (तापमान 0° C तक) पड़ती है। यहाँ राज्य की सबसे अधिक आंधियां चलती हैं।

• उष्णकटिबंधीय शुष्क जलवायु
• Bwhw (कोपेन के अनुसार) 
• DB' w (थार्नवेट के अनुसार)
• सर्वाधिक धूल भरी आंधियां
• श्रीगंगानगर में राज्य की सर्वाधिक तिरछी किरणें


4. कृषि एवं सिंचाई

विपरीत जलवायु होने के बावजूद, यहाँ की मिट्टी और नहरों के जाल ने कृषि के लिए उपयोगी बना दिया है इसीलिए इसे 'राजस्थान का बागान' भी कहा जाता है। यहाँ की शुष्क जलवायु खट्टे फलों (किन्नू और माल्टा) के लिए सबसे उपयुक्त है। यहाँ की गर्मी कपास के लिए और सर्दियों की मावट गेहूँ के लिए बहुत फायदेमंद होती है। राज्य में सर्वप्रथम हरित क्रांति की शुरुआत श्री गंगानगर से हुई थी।

• हरित क्रांति की शुरुआत
• किन्नू और माल्टा में अग्रणी
• गेहूं और कपास मुख्य फसलें
• सबसे कम पशु चरागाह योग्य भूमि
• किन्नू मंडी स्थित है।


I. घग्घर नदी

यह हिमाचल प्रदेश में शिवालिक की पहाड़ियों (कालका के पास) से निकलती है। इसे मृत नदी, नट नदी, सरस्वती नदी, दृषद्वती नदी, सोतर नदी और हकरा (पाकिस्तान में) के नाम से भी जाना जाता है। यह नदी हरियाणा और पंजाब से बहते हुए राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में टिब्बी तहसील के पास प्रवेश करती है। हनुमानगढ़ के भटनेर दुर्ग के पास यह नदी रेतीले टीलों में विलीन हो जाती है। लेकिन जब भारी वर्षा होती है, तो इसका पानी हनुमानगढ़ से आगे बढ़कर श्रीगंगानगर जिले की सूरतगढ़ और अनूपगढ़ तहसीलों तक पहुँच जाता है।

स्थानीय भाषा में इस नदी के तल/पाटे को 'नाली' कहा जाता है। यह क्षेत्र अपनी उपजाऊ मिट्टी के लिए प्रसिद्ध है। यह नदी सामान्यतः राजस्थान में ही समाप्त हो जाती है, लेकिन जब भीषण बाढ़ आती है तो इस नदी का पानी पाकिस्तान के फोर्ट अब्बास (बहावलपुर) तक पहुंच जाता है। श्रीगंगानगर में स्थित बरोर सभ्यता और पास के हनुमानगढ़ में स्थित कालीबंगा व पीलीबंगा जैसी प्राचीन सभ्यताएं इसी नदी के किनारे विकसित हुई थीं। इस नदी के बाढ़ के मैदानों में श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ और अनूपगढ़ इलाकों में गेहूँ और कपास की फसल बेहतरीन होती है।

• उदगम - हिमाचल प्रदेश
• उपनाम - मृत नदी, नट नदी, सरस्वती नदी, दृषद्वती नदी, सोतर नदी और हकरा (पाकिस्तान में)
• राजस्थान में प्रवेश - हनुमानगढ़ (टिब्बी)
• पाकिस्तान में प्रवेश - फोर्ट अब्बास से
• राज्य की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय नदी


II. रावला घड़साना किसान आंदोलन

यह आंदोलन 2004 में श्रीगंगानगर जिले की रावला और घड़साना तहसीलों से शुरू हुआ। इसका आंदोलन का मुख्य कारण सिंचाई के पानी की कमी थी। इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) के पानी के वितरण के नए नियमों से किसानों को नुकसान हो रहा था। किसान पुराने नियमों के आधार पर पर्याप्त पानी की मांग कर रहे थे। आंदोलन का नेतृत्व किसान व्यापार संघर्ष समिति ने किया था।

आंदोलन के दौरान सरकार और किसानों के बीच वार्ता विफल हो गई। घड़साना में 27अक्टूबर 2004 को पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों पर गोलियां चला दी। इस गोलीकांड में किसान चन्दूराम सहारण शहीद हो गए। आंदोलन और गोलीकांड की जांच के लिए राज्य सरकार ने आर.एस. केजरीवाल आयोग का गठन किया।

• आंदोलन वर्ष - 2004 में पानी की मांग को लेकर
• जिला - श्रीगंगानगर (रावला-घड़साना क्षेत्र)
• मुद्दा - सिंचाई का पानी (IGNP प्रथम चरण)
• मुख्यमंत्री - वसुंधरा राजे 
• किसान शहीद - चन्दूराम सहारण 
• जांच समिति - केजरीवाल आयोग
• नारा - "पानी दो या जेल दो"


III. गंगनहर परियोजना

यह नहर सतलुज नदी से निकाली गई है। इसका उदगम स्थल हुसैनीवाला (फिरोजपुर, पंजाब) में है। मुख्य नहर की लंबाई लगभग 129 किलोमीटर है, जिसमें से 112 किमी पंजाब में और 17 किमी राजस्थान में है। इस नहर का निर्माण बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। इसी कारण उन्हें 'आधुनिक भारत का भागीरथ' कहा जाता है। 26 अक्टूबर 1927 को शिवपुर हेड (श्रीगंगानगर) पर तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया था।

• उदगम स्थल - हुसैनीवाला (फिरोजपुर, पंजाब)
• नहर की लंबाई - लगभग 129 किलोमीटर (112 किमी पंजाब में और 17 किमी राजस्थान में)
• निर्माण - 26 अक्टूबर 1927
• उद्घाटन - तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा
• उद्घाटन स्थल - शिवपुर हेड (श्रीगंगानगर)
• राज्य की प्रथम नहर परियोजना
• यह नहर सतलुज नदी पर है।


IV. सूरतगढ़ कृषि फार्म

इसकी स्थापना 15 अगस्त 1956 को सूरतगढ़ में की गई थी। इस कृषि फार्म की स्थापना में रूस ने सहायता प्रदान की थी। रूस ने खेती के लिए मशीनरी और ट्रैक्टर भी उपहार स्वरूप दिए थे। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह एशिया का सबसे बड़ा यांत्रिक कृषि फार्म है। वर्तमान में इसका प्रबंधन भारतीय राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) द्वारा किया जाता है।

• स्थापना - 15 अगस्त 1956 को स्थापना (सूरतगढ़)
• सहयोग - रूस 
• एशिया का सबसे बड़ा यांत्रिक कृषि फार्म 
• प्रबंधन भारतीय राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) द्वारा


V. जैतसर कृषि फार्म

इसकी स्थापना 1 अगस्त 1964 को श्रीगंगानगर जिले की विजयनगर तहसील के जैतसर क्षेत्र से की गई थी। यह सूरतगढ़ फार्म के बाद राज्य का दूसरा सबसे बड़ा यांत्रिक कृषि फार्म है। इस फार्म की स्थापना में कनाडा सरकार ने सहायता प्रदान की थी। यहाँ मुख्य रूप से खाद्यान्न फसलों गेहूँ, जौ, तिलहन और दलहन के उच्च गुणवत्ता वाले 'प्रजनक' और 'प्रमाणित' बीजों का उत्पादन किया जाता है। यहाँ बुवाई से लेकर कटाई तक का अधिकांश कार्य आधुनिक मशीनों और ट्रैक्टरों के माध्यम से होता है। इस फार्म को सिंचाई के लिए पानी इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) और गंगनहर के माध्यम से प्राप्त होता है।

• स्थापना - 1964 (जैतसर)
• सहयोग - कनाड़ा 
• सिंचाई के लिए पानी - इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) और गंगनहर से
• मुख्य कार्य - बीजों का उत्पादन


5. मिट्टी 

श्रीगंगानगर में रेबेरीना/ साई रोजेक्स या रेतीली बलुई मिट्टी पाई जाती है।

I. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना 

इस योजना का लक्ष्य किसानों को उनके खेत की मिट्टी की गुणवत्ता की सटीक जानकारी देना है ताकि वे जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करें। सिंचाई वाले क्षेत्रों में प्रत्येक 2.5 हेक्टेयर और असिंचित या बारानी क्षेत्रों में प्रत्येक 10 हेक्टेयर से मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं। नमूनों की जांच मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में की जाती है। हर 2 साल के अंतराल पर किसानों को उनके खेत का नया कार्ड जारी किया जाता है ताकि वे बदलावों को ट्रैक कर सकें।

• शुभारंभ - 19 फरवरी 2015
• स्थान - श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़
• मुख्य पोषक तत्व - नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटेशियम (K)
• द्वितीयक तत्व - सल्फर (S)
• सूक्ष्म पोषक तत्व - जिंक (Zn), लोहा (Fe), तांबा (Cu), मैंगनीज (Mn), बोरान (B)
• भौतिक मानक - पीएच (pH), इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (EC), ऑर्गेनिक कार्बन (OC)
• नारा - "स्वस्थ धरा, खेत हरा"


6. खनिज

श्रीगंगानगर में कम मात्रा में जिप्सम व पेट्रोलियम खनिज पाए जाते हैं।

• जिप्सम श्रीगंगानगर के सिरामसर में पाया जाता है।
• पैट्रोलियम श्रीगंगानगर के सिरामसर में पाया जाता है।


7. परिवहन

परिवहन कोड - RJ


श्रीगंगानगर की कला और संस्कृति

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की कला और संस्कृति से जुड़ी जरूरी सभी जानकारी नीचे दी गई है-

1. ऐतिहासिक स्थल

श्रीगंगानगर जिले के ऐतिहासिक स्थलों के बारे में नीचे जानकारी दी गई है।

I. गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ (डाबला)

यह सिखों का एक अत्यंत पवित्र स्थल है। जिसका निर्माण 1954 ई. में फतेहसिंह द्वारा करवाया गया था। प्रतिवर्ष सावन की अमावस्या को यहाँ विशाल मेला लगता है। यह सिख समुदाय का सबसे बड़ा गुरुद्वारा है।


II. लैला-मजनूं की मज़ार (बिंजौर)

अनूपगढ़ के पास स्थित यह मज़ार प्रेम का प्रतीक मानी जाती है। यहाँ हर साल जून में 'लैला-मजनूं का मेला' लगता है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम और सिख समान रूप से भाग लेते हैं।


III. दादा पम्पाराम का डेरा (विजयनगर)

दादा पम्पाराम एक महान संत थे, यह डेरा उनकी समाधि स्थली पर बना हुआ है। यहाँ फाल्गुन माह में सात दिवसीय मेला लगता है।


IV. चुंघेर दुर्ग

यह अनूपगढ़ (श्रीगंगानगर) में स्थित है, जिसका निर्माण महाराजा अनूप सिंह ने करवाया था। अनूपगढ़ का प्राचीन नाम चुंघेर दुर्ग था।


V. रोजड़ी धाम

यह अनूपगढ़ का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहाँ हनुमान जी का भव्य मंदिर स्थित है।


VI. राष्ट्रीय कला मंदिर

यह श्रीगंगानगर शहर में स्थित कला, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र है। जिसकी स्थापना 1951 ई. में हुई थी। यहां बसंतपंचमी और शिवरात्रि के अवसर पर भारतीय शास्त्रीय संगीत का आयोजन किया जाता है।


2. प्रमुख व्यक्तित्व

I. जगजीत सिंह (गज़ल गायक)

जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को करणपुर (श्रीगंगानगर) में हुआ। उनका नाम बचपन में 'जगमोहन' था, लेकिन उनके गुरु की सलाह पर पिता ने इसे बदलकर 'जगजीत' कर दिया। उन्होंने श्रीगंगानगर के खालसा हाई स्कूल और गवर्नमेंट कॉलेज से पढ़ाई की। उन्होंने संगीत की शुरुआती बारीकियां श्रीगंगानगर में अपने गुरु पंडित छगनलाल शर्मा (जो दृष्टिहीन थे) से सीखीं थी। बाद में उन्होंने 'सैनिया घराने' के उस्ताद जमाल खान से शास्त्रीय संगीत (ख्याल, ठुमरी, ध्रुपद आदि) की शिक्षा ली। 1969 में उन्होंने प्रसिद्ध गायिका चित्रा सिंह से शादी की। 1990 में उनके इकलौते बेटे विवेक की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इस सदमे के बाद चित्रा सिंह ने गायकी छोड़ दी, लेकिन जगजीत सिंह ने अपने दर्द को अपनी आवाज़ में उतार लिया। भारत सरकार द्वारा 2003 में उन्हें कला के क्षेत्र में पद्म भूषण दिया गया। राजस्थान सरकार द्वारा 2012 में उन्हें मरणोपरांत राजस्थान रत्न पुरस्कार दिया गया।

• जन्म - करणपुर 
• भारत के प्रसिद्ध गजल गायक
• भारत सरकार द्वारा 2003 में पद्म भूषण
• राजस्थान सरकार द्वारा 2012 में मरणोपरांत राजस्थान रत्न पुरस्कार 


II. कैप्टन अवतार सिंह चीमा (पर्वतारोहण)

कैप्टन अवतार सिंह चीमा माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले पहले भारतीय थे। उन्होंने 20 मई 1965 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। वह भारतीय सेना की 7वीं पैराशूट बटालियन में कैप्टन थे।

• एवरेस्ट फतेह करने वाले प्रथम भारतीय
• उपलब्धि - 1965 में भारतीय सेना के तीसरे अभियान के दौरान उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया था।


III. रविंद्र कौशिक (जासूस)

रविंद्र कौशिक का जन्म 11 अप्रैल 1952 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में हुआ। लखनऊ में एक नाटक सम्मेलन के दौरान 'रॉ' के अधिकारियों की नजर उन पर पड़ी। मात्र 23 वर्ष की उम्र में वे भारतीय खुफिया एजेंसी 'रॉ' में शामिल हो गए थे। 1975 में उन्हें पाकिस्तान भेजा गया। वहां से उन्होंने अपनी एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। वे पाकिस्तानी सेना में भर्ती होकर 'मेजर' के पद तक पहुँच गए। 1979 से 1983 के बीच उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों की गोपनीय जानकारियां भारतीय सेना को भेजीं थी। प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने उनकी जानकारियों से खुश होकर उन्हें खुद 'द ब्लैक टाइगर' की उपाधि दी थी। बाद में रॉ ने एक अन्य जासूस 'इनायत मसीह' को पाकिस्तान भेजा था। लेकिन इनायत मसीह को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने पकड़ लिया और पाकिस्तान के टॉर्चर करने पर उसने रविंद्र कौशिक की जानकारी उन्हें दे दी। रविंद्र कौशिक को गिरफ्तार कर लिया गया। 

1985 में उन्हें पाकिस्तान में मौत की सजा सुनाई गई, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मौत का फैसला बदलकर उसे उम्रकैद में बदल दिया। वह पाकिस्तान की जेलों में लगभग 16 साल तक रहे, जहां से उन्होंने अपने परिवार को छिपकर चिट्ठियां लिखी थीं, जिनमें उन्होंने भारत सरकार के रवैये और अपनी स्थिति पर दुख व्यक्त किया। 21 नवंबर 2001 को मुल्तान की जेल में टीबी और दिल की बीमारी के कारण उनका निधन हो गया।

• जन्म - 11 अप्रैल 1952 (श्रीगंगानगर)
• उपाधि - 'द ब्लैक टाइगर'
• वह RAW एजेंट थे।


IV. महाराजा गंगा सिंह

महाराजा गंगा सिंह को आधुनिक श्रीगंगानगर के निर्माता और आधुनिक भारत का भागीरथ कहा जाता है। 1927 में गंगनहर लाकर उन्होंने मरुस्थल को उपजाऊ बनाया और श्रीगंगानगर शहर की स्थापना की। उन्होंने अपने पिता लाल सिंह की याद में बीकानेर में भव्य 'लाल गढ़ पैलेस' का निर्माण करवाया। उन्होंने 1913 में बीकानेर में 'प्रतिनिधि सभा' का गठन किया और 1922 में 'हाई कोर्ट' की स्थापना की। उन्होंने 'गंगा रिसाला' नामक एक ऊँटों की विशेष सैन्य टुकड़ी बनाई थी। उनकी इस टुकड़ी ने चीन के 'बॉक्सर विद्रोह' और प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध में विशेष भूमिका निभाई थी।

• आधुनिक श्रीगंगानगर के निर्माता
• आधुनिक भारत का भागीरथ
• गंगनहर के निर्माता 


3. प्रमुख मेले

राजस्थान के "धान का कटोरा" कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले की सांस्कृतिक पहचान यहां के मेलों और त्यौहारों से है।

I. बुड्ढा जोहड़ मेला (डाबला)

रायसिंहनगर तहसील के डाबला गांव के पास स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ स्थान पर यह मेला प्रतिवर्ष सावन माह की अमावस्या को आयोजित किया जाता है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध गुरुद्वारा है। इस स्थान का महत्व 1740 ई. से जुड़ा है, जब जत्थेदार सुक्खा सिंह और महताब सिंह ने यहीं विश्राम किया था। इस दिन पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के हजारों श्रद्धालु पवित्र सरोवर में स्नान करते हैं। इसे क्षेत्र का "कुंभ" भी माना जाता है।


II. लैला-मजनूं मेला (बिंजौर, अनूपगढ़)

इस मेले का आयोजन प्रतिवर्ष 14 और 15 जून को अनूपगढ़ के निकट भारत-पाक सीमा पर स्थित बिंजौर गांव में किया जाता है। यहां लैला और मजनूं की मजार बनी हुई है, जिसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यहां प्रेमी जोड़े और नवविवाहित जोड़े मन्नत मांगने और चादर चढ़ाने आते हैं।


III. दादा पम्पाराम मेला (विजयनगर)

इस मेले का आयोजन प्रतिवर्ष फाल्गुन माह के दौरान विजयनगर कस्बे में स्थित दादा पम्पाराम जी की समाधि (डेरा) पर किया जाता है। दादा पम्पाराम जी एक सिद्ध संत थे, जिनकी इस क्षेत्र में अगाध श्रद्धा है। सात दिनों तक चलने वाले इस मेले में भजन-कीर्तन और लंगर का आयोजन होता है। यहां मुख्य आकर्षण समाधि पर चढ़ाई जाने वाली रंगीन चादरें और सिक्ख-हिंदू संस्कृति का अनूठा संगम है।


4. अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट

श्रीगंगानगर जिले से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स नीचे दिए गए हैं।

I. सूरतगढ़ तापीय परियोजना

यह श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ के ठुकराना गांव के पास स्थित है। इसका संचालन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) द्वारा किया जाता है। यह योजना कोयला आधारित है। इस संयंत्र को पानी की आपूर्ति इंदिरा गांधी नहर से की जाती है। इसके बॉयलर, टर्बाइन और जनरेटर का निर्माण मुख्य रूप से BHEL द्वारा किया गया है। इसे "राजस्थान का आधुनिक तीर्थ स्थल" भी कहा जाता है क्योंकि यह राज्य के औद्योगिक विकास में बड़ी भूमिका निभाता है। लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए इसे कई अवार्ड्स से सम्मानित किया गया।

• स्थापना - 1999 ई. में
• राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर प्लांट
• आधुनिक राजस्थान का तीर्थ
• राज्य का सबसे बड़ा सुपरक्रिटिकल थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट
• राज्य का सर्वाधिक तापीय विद्युत का उत्पादन 
• कोयला आधारित परियोजना
• 2000 से 2004 के बीच राष्ट्रपति द्वारा 'गोल्ड शील्ड' और प्रधानमंत्री द्वारा 'ब्रोंज शील्ड' पुरस्कार


II. द गंगानहर शुगर मिल्स

इसकी स्थापना 1945 में निजी क्षेत्र में "बीकानेर इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड" के नाम से हुई थी। 1 जुलाई 1956 को राजस्थान सरकार ने इसके प्रबंधन का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। 21 जनवरी 1957 को इसका नाम बदलकर "द गंगानहर शुगर मिल्स लिमिटेड" कर दिया गया। यह मिल राजस्थान में देसी शराब की एकमात्र निर्माता है। यह अपनी "हेरिटेज लिकर" के लिए भी प्रसिद्ध है। धौलपुर में इसकी एक ग्लास फैक्ट्री भी है, जहाँ शराब की बोतलें बनाई जाती हैं।

• पंजीकृत मुख्यालय - जयपुर 
• मुख्य कार्यालय - कामिनीपुर कर्णपुर 
• 1937 ई. में स्थापना निजी क्षेत्र में 
• 1956 ई. में सरकारी क्षेत्र में स्थापित
• धौलपुर हाईटेक ग्लास फैक्ट्री से संबंधित 


III. लालगढ़ जाटान

लालगढ़ जाटान, श्रीगंगानगर में एक गाँव है जो अपनी खेती के लिए प्रसिद्ध है। यहां की लालगढ़ हवाई पट्टी और लालगढ़ छावनी भी प्रसिद्ध है। इसे राजस्थान का मक्का या हैंडबॉल कहा जाता है।


IV. इथेनॉल प्लांट

यह राजस्थान का प्रथम इथेनॉल प्लांट है जहां चावल और मक्का से इथेनॉल बनाया जाता है।


V. नेपकिन इकाई

यह फैक्ट्री श्रीगंगानगर जिले के मिर्जेवाला गांव में स्थापित की गई है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ कच्चे माल की खरीद से लेकर उत्पादन और मार्केटिंग तक का सारा काम महिलाओं द्वारा ही संभाला जाता है।


श्रीगंगानगर जिले से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

• राजस्थान का सबसे ज्यादा आंधियों वाला जिला
• राज्य की सर्वाधिक नहरी सिंचित भूमि व सबसे कम कुआँ सिंचित भूमि वाला जिला
• राज्य का प्रथम बायोगैस संयंत्र पदमपुर (श्रीगंगानगर)
• राज्य का तीसरा एग्रो फूड पार्क श्रीगंगानगर में 
• राज्य का सर्वाधिक माल्टा उत्पादित जिला
• राज्य में सर्वाधिक कुत्ते व खरगोश पाए जाने वाला जिला
• श्रीगंगानगर जिले में किन्नू मंडी स्थित है।


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